बिछी -बिछी हैं पलकें अबतक इन पलकों पर बिछे न कोई बिछे अगर तो मुझसे पहले तुमसे जाकर पूछे कोई । दिल में क्या हैं कुछ धड़कन हैं जो बस तुमसे ही चलती हैं उसके खिड़की दरवाजों पर सिवा तुम्हारे दिखे न कोई .
गुरुवार, 24 जून 2010
अब तक तो बस हमने तेरी तस्वीरों में रंग भरे हैं जब ये दिल भी चिपकेगा तो तेरी सूरत खास लगेगी .