geetonkebadal-[6]
रविवार, 9 जनवरी 2011
जीवन के तीन रूप हैं -स्वप्न जगत, प्रज्ञा जगत,द्रश्य जगत ,/
स्वप्न जगत, अव्यवस्थित है,मगर कभी -कभी निष्कर्ष पर पहुँच जाता है, /
प्रज्ञा जगत, व्यवस्थित है ,भविष्य को आयाम व आकार देता है/
द्रश्य जगत ,एक प्रत्यक्ष अनुभूति है जो .....
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