पूछ रहा है तुमसे पल -पल
रोज तुम्हारा हिंदुस्तान
वापस लाओगे तुम कब तक
इसके अधरों की मुस्कान
इसके अरमानों में कोई
अरमान तुम्हारा भी होगा
इसकी आँखों के तारों में
अभिमान तुम्हारा भी होगा
तुम चाहो तो ला सकते हो
इसमें कोई नया विहान
कहीं भूख है कहीं गरीबी
कहीं किसी की लाचारी है
कहीं घूस है ,कहीं लूट है
कहीं किसी की मक्कारी है
कुचल रहा है अपने घर में
अपने लोगों से इंसान
सबका हक़ सबको मिल जाए
अन्याय न तुमपर हो पाए
तुम जितनी मेहनत करते हो
उसका फल तुमको मिल जाए
आज तुम्हारे हाथों में है
इसका जैसे हर अभियान
तुम चाहो तो बदल के रख दो
इसके सारे अंध- विधान
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