geetonkebadal-[6]
बुधवार, 13 अक्टूबर 2010
अक्सर तुझको इन आँखों में ,कहीं बसाकर रख लेता हूँ;
एक किरन जो छिटक गई है, उसे जलाकर रख लेता हूँ;
जीवन के ये लम्बे रस्ते ,चलने से जब भी कतराते ;
शर्तें तेरी जो होतीं थीं ,इन्हें सुनाकर चल देता हूँ ;
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