geetonkebadal-[6]
गुरुवार, 21 अक्टूबर 2010
आओ मुझसे मिलकर रोलो ,सूनी-सूनी दीवारों तुम ,
शायद कोई ताजमहल का ,पत्थर तुम पर भी जड़ जाये
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें