geetonkebadal-[6]
शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2010
धुआं भरा जितना मुझमें , वो बाहर तो निकलेगा ही ,
शायद उसकी चादर में वो ,लिपटा चाँद तुम्हें दिख जाये
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