सोमवार, 4 अक्टूबर 2010

आधुनिक काल में नीरज के बाद या सन ,१९६५ से पत्र पत्रिकाओं में ,नयी कविता का दौर चल
पड़ा ,न जाने कितने प्रयोगवादी नुख्से अपनाये गये जो अब तक चले आ रहे हैं ,तुक और छंदों
वाली कविता का बहिष्कार किया गया ,नयी कविता में कुछ भी लिखना आसान है ,किसी शास्त्रीय
ज्ञान की आवश्कता नहीं ..

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