geetonkebadal-[6]
रविवार, 24 अक्टूबर 2010
वक्त शायद खींच लाये ,फिर तुम्हें अब पास मेरे ,
मुश्किलें जितनी खड़ीं थीं,मात सारी हो गईं हैं
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