सोमवार, 4 अक्टूबर 2010

लेकिन छाया वादी कवियों की परम्परा बच्चन जी का हालावाद आज भी
अपने शीर्ष पर है ,उनके बाद के कवि हाशिये पर भी नहीं दिखाई देते ,लेने को दो चार के नाम लिए जा सकते हैं ,
लेकिन जो कुछ भी सामने आया है एक दम साधारण है ,कोई युग बोध नहीं ,कुछ भी विलक्षण नहीं

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