वो सजीले नयन तेरे
क्या नहीं थे ,क्या नहीं थे
वो रसीले बैन तेरे
बांसुरी से कम नहीं थे
चंदनी-खुशबू हवा में
जब घुली तुझसे घुली थी
चांदनी नभ की धरा पर
जब खिली तुझसे खिली थी
क्या बहारों में रखा था
जश्न तेरे कम नहीं थे
छा गयीं मदहोशियाँ -सी
जिन्दगी में कुछ हमारी
धडकनों में गूंजती थीं
धडकनें आधी तुम्हारी
क्या बचाते हम जिगर को
तीर तेरे कम नहीं थे
बादलों में ,सागरों में
सिर्फ तेरा ही उमड़ना
देखने की जिद हमें थी
डूब कर तुझमें उतरना
झील की गहराइयों में
चाँद तेरे कम नहीं थे
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