मैं जीवित हूँ मेरा भ्रम है
जिन्दा तो बस मेरा श्रम है
थोडा -सा धन मैं पा जाऊं
अपनीकीमत कहाँ लगाऊं
वक्त भला क्यों तेरा ज्यादा
मेरा कैसे इतना कम है
मैं किस्मत से टकराता हूँ
किस्मत तेरी हो जाती है
मेरे हाथों से ही ये क्यों
फिसल -फिसल कर रह जाती है
तेरी ताकत कैसे ज्यादा
मेरी कैसे इतनी कम है
मेरे पास धड़कता दिल है
तेरे पास हजारों सपने
कोई सपना मेरा भी हो
छलक चुके हैं आंसू कितने
दो -रोटी का दाना -पानी
कर लूं मुझमें जितना दम है
अच्छा है धनवान नहीं हूँ
धरती का भगवान नहीं हूँ
मुझे अभावों ने पाला है
इस सच से अनजान नहीं हूँ
मुझको बस अपनों का गम है
नंगा हूँ पर तपा बदन है
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