शनिवार, 31 जुलाई 2010

बहुत तूफ़ान हैं मन में
उन्हें खामोश रहने दो
अगर मौजों ने छेड़ा तो
किनारे टूट जायेंगे
तुम्हारे प्यार के बादे
रखे हैं जो लिफाफों में
उन्हें लवरेज रहने दो
सहारे छूट जायेंगे
समुन्दर हो या दरिया हो
भरे हैं सब निग़ाहों में
तुम्हारी प्यास है इतनी
पियें तो सूख जायेंगे
उमर भर साथ रहने की
तुम्हारे साथ कसमें थीं
जिए हम जा रहे हैं पर
ज़माने बीत जायेंगे
कभी तो वक्त आएगा
तुम्हें जो पास लायेगा
मिलोगी जब लिपटकर तुम
नज़ारे झूम जायेंगे

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